मध्य कालीन विरासत और आधुनिक विकास का संगम यदि बुंदेलखण्ड क्षेत्र मे कही यदि देखा जा सकता है तो वह  झाँसी नगर है। राजा वीर सिंह जू देव ने इसका निर्माण लगभग 1613 ईस्वी में प्रारंभ करवाया था। उनको यह किला परछाई की तरह प्रतीत हुआ जिसे बुंदेली में झांई सा कहा गया था । कालातर में यही अपभ्रंश स्वरूप झांसी नामकरण हुआ था।

बुंदेला शासन के पश्चात इस क्षेत्र के प्रमुख शासन करता के रूप नार्रोकर का मराठा सुबेदार के रूप मे नाम आता है। जिन्होने झांसी किले का एक प्रमुख भाग शंकर गढ़ का निर्माण कराया था। तत्पश्चात यहाँ नेवाल कर वंश की सत्ता स्थापित हुयी जिसमें गंगाधर राव  ने 1838 मे शासन ग्रहण किया था । जिनका विवाह मणिकर्णिका (मनु ) से हुआ । जिनको आज सम्पूर्ण विश्व में वीरांगना लक्ष्मी बाई के नाम से कीति प्राप्त हुयी। राजा के स्वर्गवासी होने के पश्चात उन के पुत्र को लार्ड डलहौजी ने राज्य हड़प नीति के तहत उनके राज्य को अंग्रेजी शासन में मिला लिया था। इसके पश्चात अंग्रेजों और रानी के मध्य संघर्ष प्रारंभ हुआ । रानी किले की दीवार से घोड़े पर सवार होकर कूद कर अदम्य साहस क परिचय देते हुये कालपी की ओर निकल गयीं थी । इसके पश्चात उन के पक्ष में तात्या टोपे ने अंग्रेजों से लोहा लिया । किंतु वे सफल नहीं हो सके । रानी की हमशक्ल झलकारी बाई ने युद्ध करते हुये अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। रानी लक्ष्मी बाई भी युद्ध करते हुये वीरगति को प्राप्त हुयी । इस दौर की कड़क बिजली एवं भवानी शंकर तोपें आज भी संघर्ष की याद दिलाती हैं ।

इसके पश्चात यह क्षेत्र महान क्रांतिंकारी पंडित चंद्रशेखर आजाद जी के अंग्रेजो के संघर्ष काल की शरण स्थली रहा। ओरछा के जंगलों में उन्होंने दीर्घकाल तक निवास किया। यहां उन्होंने सातार नदी के निकट हरिशंकर ब्रहमचारी के नाम से निवास किया था। जिसमे झांसी निवासी रुद्र नारायण मास्टर जी का सहयोग प्राप्त हुआ था।

झांसी को बुन्देलखण्ड का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है । प्राचीन वेत्रवती नदी जिसे वेतवा नदी कहा जाता है झांसी जिले की जल जीवन रेखा है। झांसी का महालक्ष्मी मंदिर प्राचीन है। यहां के गणेश मंदिर में गगांधर राव का रानी लक्ष्मी बाई से विवाह सम्पन्न हुआ था। पहाडी पर निर्मित प्रसिद्ध हाकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा अद्भुत है। इसके अतिरिक्त पंचतंत्र की कहानी आधारित थीम पार्क भी वच्चो को आकर्षित करता है । वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत यहां के खिलोना निर्माण को चुना गया है ।

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