महोबा प्रागैतिहासिक काल से मानव सभ्यता के स्रोत स्थलों में रहा है। इसकी पुष्टि आर्कियोलोजी के सर्वे के द्वारा प्राप्त सामग्रियों से हुयी है। महोत्सव नगर महोबा का इतिहास मूलतः चंदेल राजवंश के संस्थापक राजा चंद्रवर्मन जिन्हे नन्नुक चंदेल के नाम से भी जाना जाता है के समय से प्राप्त होता है। उन्होंने यहाँ एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया था । इस काल में यह क्षेत्र जेजाकभुक्ति के नाम से जाना जाता था। । महोवा नगर चंदेलों की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक राजधानी के रूप में विख्यात रहा । इसी वंश के राजा विधाधर चंदेल ( 1003-1035) भारतीय इतिहास के एक मात्र शूर वीर नरेश थे जिन्होंने आक्रमण कारी महमूद गजनवी को युद्ध में संधि हेतु विवश कर दिया था। इसके अतिरिक्त अंतिम चंदेल राजा परमर्दिदेव का जिन्हे राजा परपाल के नाम से भी जानते है। इनका नाम विख्यात है। इन्हीं के समय वीर आल्हा एवं ऊदल  का वीरता पूर्ण काल था। इ दोनों भाइयों के द्वारा राज्य रक्षा हेतु 52 युद्ध लडे गये । इसी के साथ कीरत सागर के मैदान मे दिल्ली नरेश प्रथ्वी राज चौहान के साथ भीषण युद्ध हुआ था। इनकी वीरता पर कवि जगनिक द्वारा रचित आल्हा खंड विश्व के बृहदतम एवं लोक प्रिय वीर रस की रचना माना जाता है। आज भी जिसके स्वर सावन के महीने मे पूरे उत्तर  भारत की चौपालों में गूंजते है। इसके पश्चात कुतुबुद्दीन ऐबक ने महोबा एवं कालिंजर पर आधिपत्य स्थापित कर लिया था। मुगल काल के दौरान अबुल फजल द्वारा रचित आइने अकबरी मे भी पान के बरेजो द्वारा प्राप्त राजस्व को आप का एक बड़ा स्रोत बताया गया। वर्तमान में भी यहाँ का देशावरी पान जी आई टैंग उत्पाद की श्रेणी मे आता है । लगभग 1803 के पश्चात यह क्षेत्र अंग्रेजो के नियंत्रण में आ गया था।

महोबा के प्रसिद्ध स्थलों में कीरत सागर, मदन सागर , कल्याण सागर एवं बीजा नगर सरोवर प्रमुख है। यहाँ पर गुरु गोरक्ष नाथ की तपस्थली गोरख पहाड़ी गजांतक के वध करती हुयी अद्वितीय शैल प्रतिमा बड़ी चंद्रिका एवं छोटी चंद्रिका मंदिर अदभुत है। पीछे के पहाड़ी मे जैन मूर्तियां भी उत्कीर्ण की गयी है । जो उस समय के जैत्र धर्म के इस क्षेत्र में अभ्युदय को प्रदर्शित करता है। रहलिया का सूर्य मंदिर भी स्थापत्य शैली का प्रमुख उदाहरण है। महोबा जिले की स्थापना 11 फरवरी 1995 को की गयी थी।

Mahoba

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *